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03 अक्तूबर, 2010

कॉमनवेल्थ गेम्स का भव्य शुभारंभ

shivani
19वें कॉमनवेल्थ गेम्स का शुभारंभ दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में हो चुका है और भारत समेत दुनिया भर से आए 7 हजार खिलाड़ी आकर्षक मार्चपास्ट के ‍जरिये स्टेडियम में मौजूद करीब 60 हजार दर्शकों को रोमांचित कर रहे हैं। इन खेलों का आगाज राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने किया।

रविवार की शाम जैसे ही अँधेरे में तब्दील हुई वैसे ही लाखों लोगों ने पहली बार नीली रौशनी में नहाए जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम का विहंगम नजारा देखा। यह स्टेडियम बाहर से इतना खूबसूरत नजर आ रहा था कि भीतर न जा सके लोग फ्लाय ओवरब्रिज ही नहीं बल्कि ऊँची इमारतों से स्टेडियम को देख रहे थे।

महीनों से जिस घड़ी का दुनिया भर को इंतजार था, वह घड़ी आखिर आ ही गई। स्टेडियम में जाने के लिए दर्शकों को लंबी कतारों और तीन तरह की कड़े सुरक्षा चक्र से गुजरना पड़ा। कई नामी हस्तियों को भी प्रवेश के लिए कई मिनटों तक इंतजार करना पड़ा।

पूर्व मिस यूनिवर्स सुष्मिता सेन उद्‍घाटन समारोह में आज किसी कार्यक्रम को पेश नहीं कर रहीं थी। उन्हें भी स्टेडियम में जाने के लिए आधे घंटे तक इंतजार करना पड़ा। सुष्मिता ने कहा कि मैं एक भारतीय होने के नाते समारोह में आई हूँ। मैं इस अवसर पर खुद को काफी रोमांचित अनुभव कर रही हूँ।

स्टेडियम के भीतर प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहनसिंह, पूर्व राष्ट्रपति एपीजे कलाम, प्रिंस चार्ल्स के साथ माइक फैनेल भी विशेष अतिथि दीर्घा में मौजूद हैं।

जो दर्शक नेहरू स्टेडियम में पहले से पहुँच गए थे, वे बोरियत महसूस नहीं करें, इसके लिए शाम 5 बजे से ही वार्मअप इंटरटेनमेंट शुरू हो चुका था। सबसे पहले शिवानी कश्यप ने अपना कार्यक्रम पेश किया।

19वें कॉमनवेल्थ गेम्स की सुरक्षा को लेकर कोई कोताही नहीं बरती जा रही है। यहाँ तक कि लाल और पीली बत्ती को छोड़कर वीआईपी भी स्टेडियम तक आने वाली लाल रंग की बसों में सवार हुए। यहाँ तक कि गृह सचिव भी बस में बैठकर ही स्टेडियम तक पहुँचे।

कुल मिलाकर इस वक्त दिल्ली दुल्हन की तरह सजी है और इस नजारे को देखने वाले अद्‍भुत रोमांच से सराबोर हैं। शुभारंभ समारोह के दौरान पूरी दुनिया भारतीय सांस्कृतिक विरासत से रूबरू हो रही है। इस भव्य समारोह में भारत की 5 हजार वर्षों की संस्कृति के सात रंगों की ऐसी छटा बिखरी कि स्टेडियम में मौजूद करीब 60 हजार दर्शक तथा टेलीविजन पर समारोह को देख रहे अरबों दर्शक रोमांचित हो रहे हैं।

यह तीसरा मौका है जब भारत किसी बड़े खेल इवेंट्स की मेजबानी कर रहा है। इससे पहले वह 1951 और 1982 में एशियाई खेल आयोजित कर चुका है और तीनों बार मेजबानी का दायित्व दिल्ली को मिला है।

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