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01 सितंबर, 2009

जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल समाप्त

बिहार में बुधवार से चल रही जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल सोमवार की शाम 5वें दिन सरकार के साथ हुई एक सार्थक बातचीत के बाद समाप्त हो गई ।
सरकार ने जूनियर डॉक्टरों के मानदेय (स्टाइपन) बढ़ाने की मांग स्वीकार कर ली है तथा अन्य मांगों के लिए एक समिति का गठन करने का ऐलान किया है जो 15 अक्टूबर तक सरकार को रिपोर्ट सौंप देगी।
राज्य के स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि राज्य के स्वास्थ्य मंत्री नंदकिशोर यादव तथा पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल के जूनियर डॉक्टरों के एक प्रतिनिधि मंडल की शाम को हुई बैठक में सरकार ने डॉक्टरों की लगभग सभी मांगों को मानते हुए डॉक्टरों से हड़ताल से वापस आने का अनुरोध किया जिसे संघ ने मानते हुए हड़ताल वापस लेने का निर्णय लिया।
अधिकारी का कहना है कि सरकार ने जूनियर डौटरों के मानदेय को बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रतिमाह करने का निर्णय लिया है तथा अन्य मांगों के लिए एक समिति का गठन करने की घोषणा की है। सरकार ने सभी मांगों को मानने के लिए 15 अक्टूबर तक का समय लिया है।
इधर, जूनियर डॉक्टर संघ के धनंजय कुमार ने सोमवार को बताया कि स्वास्थ्य मंत्री के साथ हुए समझौते के बाद आज आधी रात के बाद सभी जूनियर डॉक्टर काम पर लौट आएंगे। गौरतलब है कि बिहार के दो मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में जूनियर डॉक्टरों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर बुधवार की शाम से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए थे। हड़ताल के कारण पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (पीएमसीएच) एवं दरभंगा मेडिकल कॉलेज अस्पताल (डीएमसीएच) में चिकित्सा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई थी, जिससे 42 लोगों की मौत हो गई थी। सरकार ने जूनियर डॉक्टरों की इस हड़ताल को अवैध भी घोषित कर दिया था।

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