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29 अगस्त, 2009

सावधान! मोबाइल पर हो सकता है हमला

महंगे और हाइटेक मोबाइल भी अब लेटेस्ट वायरस का शिकार हो रहे हैं। तमाम खूबियों से लैस इन मोबाइल्स में एक वायरस पहुंचते ही पूरा सिस्टम ध्वस्त कर देता है। वायरस के बढ़ते हमले ने अब हाइटेक मोबाइल धारकों की शामत ला दी है। एजुकेशन हब के हाइटेक छात्र भी मोबाइल वायरस के शिकार बन रहे हैं। वायरस का शिकार होने से मोबाइल रिपेयरिंग करने वालों की चांदी हो गई है।

बीटेक छात्र कार्तिकेय ने कहा कि दो माह पूर्व ही 28 हजार रुपए का महंगा मोबाइल खरीदा था। एक दिन फ्रेंड्स के साथ ब्लू टूथ के जरिए फाइल ट्रांसफर के दौरान एक अनजान यूजर की फाइल भी स्वीकार कर ली। इसके बाद न जाने कौन सा वायरस आया और क्या हुआ कि मोबाइल बेकार हो गया। सबसे ज्यादा दुख इस बात का हुआ कि मोबाइल में मौजूद जरूरी फोन नंबर्स, डेटा और फाइल्स भी बेकार हो गई। एमसीए छात्र शोभित ने बताया कि जब उनके दो मोबाइल किसी अनजान व्यक्ति द्वारा भेजे गए वायरस से खराब हो गए, तो वह भी वायरस से दूसरों के मोबाइल खराब करने की ठान ली। हालांकि उन्हें खराब मोबाइल्स की संख्या तो नहीं पता, लेकिन मानते हैं कि तकरीबन दो दर्जन मोबाइल उनके द्वारा भेजे गए वायरस का शिकार बन चुके हैं। लेटेस्ट मोबाइल वायरस के लिए वो लगातार नेट सर्च करते रहते हैं।

मोबाइल फोन साफ्टवेयर डीलर अभिषेक कहते हैं कि यदि मोबाइल वायरस का शिकार हो जाए तो फिर उसकी फोन और कार्ड मेमोरी को फॉर्मेट करना ही आखिरी चारा होता है। हर सप्ताह करीब 35-40 लोग कार्ड फार्मेट कराने व एंटी वायरस लोड कराने आते हैं।

कैसे आ सकता है वायरस

* किसी भी जरिए से फाइल ट्रांसफर करते समय मसलन ब्लूटूथ, इंफ्रारेड, डेटा केबल, मेमोरी कार्ड आदि।

* किसी गाने, रिंगटोन, विडियो क्लिप, एमएमएस, पिक्चर, गेम, साफ्टवेयर आदि के साथ।

क्या है मोबाइल वायरस

* एक इलेक्ट्रानिक वायरस जो मोबाइल डिवाइसेज या पीडीए को अपना निशाना बनाता है।

* मोबाइल और पीडीए नेटवर्क ज्यादा सघन होते हैं, इसलिए इन्हें इलेक्ट्रानिक हमले से बचाना ज्यादा कठिन होता है।

* कैबीर, डट्स, स्कल्स और कामनवैरियर मोबाइल के प्रसिद्ध वायरस हैं।

* मोबाइल एंटी वायरस साफ्टवेयर डेवलपर कंपनी एफ-सिक्योर के अनुसार अभी तक 400 से ज्यादा वायरस डिटेक्ट किए जा चुके हैं।

कैसे बचें

* ब्लूटूथ और इंफ्रारेड स्विच ऑफ और नॉन डिस्कवरेबल मोड पर रखें।

* भेजी गई फाइल स्वीकार करने से पहले नाम देख लें।

* हमेशा नोन पर्सन से ही फाइल स्वीकार करें।

* फोन पर लेटेस्ट एंटी वायरस साफ्टवेयर इंस्टाल करें और हमेशा आन रखें।

* नियमित रूप से एंटी वायरस स्कैनिंग करें।

* मोबाइल से किसी भी अनजान और अनचाहे प्रोग्राम को डाउनलोड न करें।

* कई वेबसाइट्स पर मुफ्त में एंटी वायरस साफ्टवेयर हैं जिन्हें इंस्टाल करें।

* हमेशा फोन में मौजूद डेटा का अपने कंप्यूटर और सीडी में बैकअप रखें।

* अधिकांश वायरस फाइल्स का एक्सटेंशन डाट एसआईएस होता है, ऐसी फाइल्स को इंस्टाल करने से पूर्व किसी मोबाइल एक्सपर्ट या इंटरनेट की मदद लें।

कैसे आए वायरस

* जून 2004 में ओजन कंपनी ने अपने मोबाइल फोन गेम मास्किटो के लिए एंटी पायरेसी ट्रोजन वायरस बनाया। यह वायरस स्वत: ही यूजर के मोबाइल से कंपनी को एसएमएस भेजता था।

* जुलाई 2004 में मोबाइल वायरस की संकल्पना पर कैबीर निर्मित हुआ। यह वायरस ब्लूटूथ नेटवर्क द्वारा अपना विस्तार करता गया।

* मार्च 2005 में कामनवरियर नामक कंप्यूटर वार्म ने सिंबियन [सीरिज-60] मोबाइल्स को अपना निशाना बनाया।

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