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27 अगस्त, 2009

रमजान के मौके पर भी नहीं मिल पा रहा राशन

रमजान मुसलमानों का सबसे पवित्र महीना होता है। इस महीने में मुसलमानों का एकमात्र मकसद होता है खुदा की इबादत करना। रोजा [सुबह सूर्य निकलने से लेकर सूर्य ढ़लने तक कुछ नहीं खाना-पीना] रखने के बाद लोग शाम को ही मुंह में निवाला डालते हैं। लेकिन पाकिस्तान में इबादत के इस महीने में भी गरीब रोजेदारों को अन्न नसीब नहीं हो पा रहा। राशन की दुकानों के बाहर हजारों की भीड़ है, उनकी आंखों में गुस्सा है लेकिन हाथ खाली हैं।
पूरे पाकिस्तान का यही हाल है। हैदराबाद में राशन की दुकान पर घंटों भीड़ में खड़े रहने के बाद एक महिला तो बेहोश ही हो गई। खैरपुर में राशन न मिलने की लोगों ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई। राजस्व अधिकारियों का दावा है कि हैदराबाद में 16 हजार अनाज के बोरे आवंटित किए गए। रिपोर्टो की मानें तो अलग-अलग इलाकों में महज 300-600 बोरे अनाज [प्रतिव्यक्ति 10 किग्रा के हिसाब से] ही वितरित किया गया। कमी इतनी बड़ी है कि इसकी भरपाई करना मुश्किल है।
लोगों ने राशन नहीं मिल पाने के पीछे सरकार को दोषी ठहराया है। एक तरफ जहां लोगों को अनाज नहीं मिल पा रहा वहीं अनाज की कालाबाजारी व चोरी बड़े पैमाने पर हो रही है। निरीक्षण के दौरान 10 किग्रा की बोरी में जहां अनाज कम पाया गया, वहीं अपने हिस्से का अनाज लेने के लिए भी लोगों को रिश्वत देनी पड़ रही है। हालांकि अधिकारियों ने ऐसी किसी भी बात से इन्कार किया है। राशन की दुकानें सरकारी होती हैं। यदि उनमें अनाज नहीं है तो यह सरकार के लिए चिंता की बात है।

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