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26 जुलाई, 2009

प्रधानमंत्री द्वारा परमाणु पनडुब्बी अरिहंत का जलावतरण


प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहनसिंह ने रविवार को विशाखापट्टनम में स्वेदशी तकनीक से निर्मित देश की पहली परमाणु पनडुब्बी का जलावतरण किया। इस अवसर पर रक्षा मंत्री एंटोनी और भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल सुरीश मेहता भी उपस्थित थे।
नौसेना की परम्परा की अनुसार प्रधानमंत्री की पत्नी गुरशरण कौर ने इस अवसर पर नारियल फोड़ा और इस पनडुब्बी का नाम 'आईएनएस अरिहंत' रखने की घोषणा करने की रस्म पूरे जोशो-खरोश की साथ पूरी की।
जलावतरण के मौके पर डॉ.सिंह ने कहा कि यह परमाणु पनडुब्बी हमारे वैज्ञानिकों और रक्षाकर्मियों की देशभक्ति का नमूना है, जिन्होंने कई बाधाओं को पार करके देश को इस उन्नत रक्षा तकनीक के बारे में आत्मनिर्भर बनाया है।
परमाणु पनडुब्बी के विकास को अत्यंत विशेष उपलब्धि बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार देश की रक्षा के लिए जरूरी सभी उपाय करेगी और विश्व में तकनीक के विकास की गति से कदम से कदम मिलाकर चलेगी।
इस मौके पर रक्षा मंत्री एके एंटनी ने परमाणु पनडुब्बी के जलावतरण को ऐतिहासिक और गौरवशाली क्षण करार दिया जबकि नौसेना प्रमुख एडमिरल सुरीश मेहता ने कहा कि अब भारत को जवाबी परमाणु प्रतिरोध करने का प्लेटफार्म मिल गया है।
इस पनडुब्बी को ‘आईएनएस अरिहंत’ के नाम से व्यापक समुद्री परीक्षण के बाद नौसेना में शामिल किया जाएगा। 6000 टन की यह पनडुब्बी पहले दो साल परीक्षण पर रहेगी। इसकी लागत 3200 करोड़ रुपए हैं। इस पनडुब्बी का निर्माण भाभा एटोमिक रिसर्च सेंटर ने किया है। यह पनडुब्बी 12 से 15 हजार परमाणु मिसाइल ले जाने में सक्षम है।
विशाखापट्टनम स्थित शिप बिल्डिंग सेंटर के सूत्रों ने बताया कि इस परमाणु पनडुब्बी पर सामरिक मिसाइले-पोतभेदी मिसाइल और तार पिडो लगाए जाएगे।
परियोजना के महानिदेशक वाइस एडमिरल डीएसपी वर्मा ने कहा कि इस परियोजना का महत्वपूर्ण चरण अब पूरा हो गया है और अब इसके दिल की धड़कनों को चालू किया जाएगा।
सेंटर के सूत्रों ने बताया कि पनडुब्बी का व्यास 11 मीटर है और इसके चालक दल के सदस्यों की संख्या 100 से कुछ कम होगी। उन्होंने बताया कि देश की दूसरी परमाणु पनडुब्बी का विकास कार्य भी साथ साथ शुरू किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि तकनीक से वंचित रखने और सामग्री एवं विशेषज्ञता की बाधाओं को पार कर लिया गया है और दूसरी परमाणु पनडुब्बी के विकास में अब ये बाधाएँ नहीं आएगी।
प्रधानमंत्री के पनडुब्बी को हरी झंडी दिखाते ही भारत परमाणु पनडुब्बी वाला विश्व का छठा देश बन गया है। इससे पहले यह उपलब्धि अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, रूस और ब्रिटेन ने प्राप्त की थी। 'आईएनएस अरिहंत' पनडुब्बी को बनाने में 20 वर्ष का समय लगा।

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