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15 जून, 2009

बिहार में मक्के की खेती को अंतर्राष्ट्रीय सहयोग

मक्का की खेती को लाभकारी बनाने को अंतर्राष्ट्रीय वित्त निगम ने सरकारी-निजी भागीदारी के तहत पहल शुरू कर दी है। इसके लिए अधिकाधिक संख्या में गोदाम का निर्माण होगा। मक्का की खपत के लिए मुर्गी दाना बनाने की फैक्ट्री स्थापित करने के लिए निजी क्षेत्र को तैयार किया जायेगा। इससे मुर्गीपालन को भी बढ़ावा मिलेगा। कृषि विभाग के अधिकारी के अनुसार निगम की ओर से विश्व बैंक के पदाधिकारी एस स्टीवर्ड ने राज्य में मक्का की संभावनाओं का अध्ययन किया है। विश्वबैंक के पदाधिकारियों के अनुसार बिहार में मक्का के लिए व्यापक क्षेत्र है किन्तु भंडारण की व्यवस्था नहीं हो सकी है। मक्का का अधिकाधिक उपयोग कर किसानों की बेहतरी के लिए विभिन्न देशों में योजना तैयार करने में जुटे ग्रांट कभानोक ने कहा कि दक्षिण अफ्रीका,अमेरिका, फिलीपींस व पाकिस्तान में मक्का को उपयोगी बनाने की योजना सफल रही है। मक्का के अधिकाधिक उपयोग को बढ़ावा देने के लिए विश्वबैंक के पदाधिकारियों ने कृषि विभाग व निजी संस्थाओं के संचालकों के साथ विचार-विमर्श किया है। इस सम्बन्ध में 25 जून को पटना में कार्यशाला का आयोजन भी किया गया है जिसमें मक्का किसानों की समस्याओं के निराकरण के उपाय किए जाएंगे।
कृषि क्षेत्र को व्यवसायिक स्वरूप देने के लिए विश्वबैंक ने बिहार के लिए एक समन्वयक नियुक्त किया है जो समस्याओं के समाधान की दिशा में सरकार व निजी क्षेत्र से विचार विमर्श करेगा। विश्व बैंक के अधिकारियों के अनुसार समस्याओं से सभी लोग अवगत हैं किन्तु इसके समाधान को लेकर मतैक्य नहीं है। समन्वयक स्टीयूट के अनुसार समस्या की पहचान से अधिक कठिन समाधान का उपाय है। भण्डारण की समस्या से निबटने के लिए अधिकाधिक संख्या में गोदाम निर्माण की आवश्यकता महसूस की गयी है। गोदाम निर्माण के लिए राशि की व्यवस्था किस प्रकार होगी। यह तय नहीं हो सका है। गोदाम के भीतर मक्का ले जाने व बाहर लाने के लिए 'ग्रेन इवीलेटर' को जरूरी माना गया है। इससे मानव शक्ति पर होने वाले अनावश्यक व्यय को रोका जा सकेगा। राज्य में 15 लाख टन मक्का के भण्डारण की आवश्यकता है। विश्वबैंक के मक्का विशेषज्ञों के सहयोग से भण्डारण सुविधा को अत्याधुनिक बनाया जा सकेगा। अधिकारियों के अनुसार मक्का की खेती भागलपुर जिले के नवगछिया , खगड़िया, बेगूसराय सहित बिहार के विभिन्न जिलों में होती है जबकि मुर्गी दाना बनाने के लिए मक्का को राज्य से बाहर भेजा जाता है। इसकी व्यवस्था समीप में ही होने से मक्का उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा।

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