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02 अप्रैल, 2011

जश्न में डूबा पूरा भारत


भारत में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ, जो पिछले चार दिन के अंदर हुआ। भारतीयों ने इन चार दिनों में दो बार दीवाली मनाई। पहले 30 मार्च को चिर-प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान पर जीत के बाद और शनिवार को 28 साल बाद दूसरी बार विश्व चैंपियन बनने की खुशी में। पटाखे तो तभी छूटने लगे थे जब भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धौनी ने 48वें ओवर में श्रीलंकाई पेसर लसित मलिंगा पर दो चौके जड़कर 14 गेंद पर जीत के लिए सात रन का आंकड़ा बना दिया था। राजधानी दिल्ली के गली-मोहल्लों से लेकर कनाट प्लेस और इंडिया गेट पर जीत का जश्न देखने लायक था। आकाश आतिशबाजी से चमचमा रहा था। पटाखे फूट रहे थे। ढोल-नगाड़ों की थाप पर लोग थिरक रहे थे। धौनी के रणबांकुरों ने देश को वह मौका दे दिया था जिसका उसे 1983 से इंतजार था। नाचने और झूमने का यह माहौल देर रात तक चलता रहा। दिल्ली ही नहीं देश के हर शहर, गांव और कस्बे में यही आलम था। मुंबई, चेन्नई, हैदराबाद, बेंगलूर, जयपुर, लखनऊ, पटना, भागलपुर, नवगछिया , भोपाल, इंदौर, अहमदाबाद और चंडीगढ़ में भी जीत का जश्न जमकर मनाया गया। समूचे भारत में दीवाली के बाद शनिवार रात ही सबसे ज्यादा पटाखे फूटे। इधर भागलपुर और नवगछिया में भी विश्व कप जीतने के उत्साह में लोग जश्न में डूब गए।

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