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12 अगस्त, 2009

दो इंजीनियरिंग कालेजों में 60 सीटें बढ़ी

बिहार के दो राजकीय इंजीनियरिंग कालेजों में नए शैक्षिक सत्र से सिविल इंजीनियरिंग की भी पढ़ाई होगी। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अनुरोध को आल इंडिया कांउसिल आफ टेक्निकल एजुकेशन (एआईसीटीई) ने स्वीकार करते हुए गया व दरभंगा स्थित सरकारी इंजीनियरिंग कालेजों में सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई आरंभ किए जाने की अनुमति प्रदान कर दी है। फिलहाल इन दोनों कालेजों में साठ-साठ छात्रों के दाखिले की अनुमति मिली है। वहीं बिहार के दो निजी इंजीनियरिंग कालेज जिसमें बिहटा स्थित नेताजी सुभाषचंद्र बोस इंस्टीच्यूट आफ टेक्नोलाजी व पूर्णिया स्थित मिलिया इंस्टीच्यूट आफ टेक्नोलाजी शामिल हैं में भी नए सत्र से सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू किए जाने की अनुमति दी गयी है। निजी इंजीनियरिंग कालेजों में भी साठ-साठ छात्रों के दाखिले को अनुमति मिली है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के आला अधिकारियों ने बताया कि मोतिहारी स्थित सरकारी इंजीनियरिंग कालेज में भी सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई आरंभ किए जाने को ले एआईसीटीई को लिखा गया था पर अनुमति नहीं मिली। गया व दरभंगा स्थित सरकारी इंजीनियरिंग कालेज में फिलहाल कंप्यूटर साइंस, मेकेनिकल तथा इलेक्टि्रकल एंड इलेक्ट्रोनिक्स की पढ़ाई की अनुमति है। सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू किए जाने को ले उपलब्ध आधारभूत संरचना के संबंध में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अधिकारियों ने बताया कि दरभंगा व गया में पूर्व से ही सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई से संबद्ध लैब है। शिक्षकों की नियुक्ति की प्रक्रिया बिहार लोक सेवा आयोग की देखरेख में चल रही है। पहले वर्ष में ऐसे सभी ट्रेड के छात्रों को एक ही तरह की पढ़ाई करनी होती है इसलिए एक वर्ष तक कोई परेशानी नहीं है।

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