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20 जुलाई, 2009

धारा 377 पर हाईकोर्ट का फैसला बरकरार


सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को समलैंगिकता के मामले पर दिल्‍ली हाई कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले को बरकार रखा है. सुप्रीम कोर्ट ने धारा 377 पर हाईकोर्ट के फैसले पर स्टे लगाने से साफ इंकार कर दिया है. अदालत ने इस मामले में सरकार से दो हफ्ते में जवाब दाखिल करने को भी कहा है.

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने , को संविधान के अनुच्छेद 21 की भावना के खिलाफ बताया था। दिल्ली हाईकोर्ट ने समलैंगिकों के संगठन नाज फाउंडेशन की याचिका पर फैसला सुनाया था. धारा 377 कहती है कि समान लिंग वाले लोग आपस में जिस्मानी रिश्ते नहीं रख सकते. जबकि दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के मुताबिक अगर दो लोग बालिग हैं, और रजामंदी से रिश्ते रखना चाहते हैं, तो इसमें किसी को कोई एतराज नहीं होना चाहिए. दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा था कि धारा 377 अगर ऐसे रिश्तों को अपराध की श्रेणी में रखती है, तो ये अनुच्छेद 21 के खिलाफ है, जो समानता, निजी स्वतंत्रता और लिंग के आधार पर भेद ना करने की बात कहता है.

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