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26 अगस्त, 2009

चीनी भंडार खत्म होने की कगार पर


चीनी के दाम दुनिया भर में बढ़ रहे हैं। गन्ना उत्पादन में आई भारी कमी के कारण भारत में चीनी के दामआसमान पर हैं। इसे देखते हुए सरकार ने चीनी की जमाखोरी रोकने के लिए सख्त कदम उठाने के संकते दिए हैं।
ताजा निर्देश के मुताबिक कोई भी कंपनी 15 दिनों से ज्यादा का चीनी भंडार अपने पास नहीं रख सकती। इसका मकसद खुले बाजार में चीनी की आपूर्ति बढ़ाना है ताकि बढ़ती कीमतों पर काबू पाया जा सके। चीनी के भंडारण पर नियंत्रण अगले छह महीने तक लागू होगी। ये वैसे उपभोक्ताओं पर लागू होगी जो हर माह एक हजार किलो चीनी की खपत करते हैं।
भारत ने ब्राजील और थाईलैंड से चीनी आयात करने के लिए कॉंट्रेक्ट किया है। भारत में आयात बढ़ने के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी चीनी की कीमतों पर असर पड़ा है और वायदा बाजारों में इसके दाम बढ़ गए हैं।
कृषि मामलों के जानकार और भारतीय चीनी उद्योग पर किताब लिख चुके पत्रकार हरवीर सिंह कहते हैं, 'ऐसा नहीं है कि पहले आयात नहीं होता था। फर्क ये है कि इस बार अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दाम बढ़ गए हैं।'
वो कहते हैं, 'अभी बाहर से आयात करने पर तैयार चीनी की कीमत 30-32 रुपए प्रति किलो है, लेकिन खुदरा दुकान तक पहुँचते-पहुँचते ये 40 रुपए प्रति किलो की दर से बिकेगी।'
भारत के घरेलू बाजार में हर साल 220 लाख टन चीनी की माँग रहती है। इस साल 150 लाख टन उत्पादन हुआ है और 90 लाख टन आयात हुआ है।
हरवीर सिंह कहते हैं, 'इस हिसाब से 20 लाख टन का भंडार बचा है। इसे देखते हुए सरकार ने 25 लाख टन कच्चे चीनी के आयात का फैसला किया जिसमें से 15 लाख टन की खेप आ गई है।'
इस साल बड़े पैमाने पर चीनी का उत्पादन करने वाले देशों जैसे भारत, ब्राजील, थाईलैंड और ऑस्ट्रेलिया में गन्ने का उत्पादन कम हुआ है जिससे कीमते बढ़ी हैं। इसके कारण आने वाले त्योहारों के मौसम में चीनी की मिठास पाने के लिए और जेब ढीली करनी पड़ सकती है।

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