केन्द्रीय कर्मचारियों का महँगाई भत्ता 5 फीसदी बढ़ा
केन्द्र सरकार ने अपने कर्मचारियों के महँगाई भत्ते में पाँच प्रतिशत की वृद्धि करने के साथ ही आज किसानों और निम्न एवं मध्यम वर्ग की दृष्टि से कई अहम् निर्णय लिए जिनमें तीन लाख रुपए तक के फसली कर्ज पर ब्याज राहत, मकान के लिए दस लाख रुपए तक के कर्ज पर ब्याज में एक प्रतिशत की कमी और 1984 के दंगा पीडितों के लिए घोषित राहत पैकेज का अन्य राज्यों में विस्तार शामिल है।
प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में लिए गए इन फैसलों को अगले महीने तीन राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अगले महीने 13 तारीख को महाराष्ट्र, हरियाणा और अरुणाचल प्रदेश में विधानसभा के लिए मतदान होना है।
महँगाई भत्ता 27 प्रतिशत : सरकार ने त्योहारों से पहले केन्द्रीय कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए जहाँ महँगाई भत्ता पाँच प्रतिशत बढ़ाकर 27 प्रतिशत कर दिया है, वहीं नियत समय पर कर्ज लौटाने वाले किसानों को तीन लाख रुपए तक का फसली कर्ज छह प्रतिशत ब्याज पर देने की बजट घोषणा को मंजूरी दे दी है।
आवास ऋण पर ब्याज दर में रियायत : हालाँकि अन्य किसानों को पिछले साल की भांति सात प्रतिशत की दर पर ही अल्पावधि फसली कर्ज मिलेगा। निम्न एवं मध्यवर्ग की सहूलियत के लिए दस लाख रुपए तक के आवास ऋण पर ब्याज दर में एक प्रतिशत की रियायत देने की बजट घोषणा को भी मंजूरी दे दी गई। सरकार ऐसे आवास ऋण पर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के एक प्रतिशत ब्याज की भरपाई करेगी। इसके लिए बजट में 1000 करोड़ रुपए की व्यवस्था की गई है।
714.76 करोड़ रुपए का अतिरिक्त राहत पैकेज : 1984 दंगों के पीड़ितों के लिए जनवरी 2006 में घोषित राहत पैकेज का विस्तार इससे वंचित राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों में भी किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार ने न्यायमूर्ति नानावटी आयोग की रिपार्ट मिलने के बाद संसद के दोंनों सदनों में इसका आश्वासन दिया था। सरकार ने 84 दंगा पीड़ितों के लिए 714.76 करोड़ रुपए के अतिरिक्त राहत पैकेज को मंजूरी दी थी। यह राहत पैकेज उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, हरियाणा, बिहार, झारखंड, जम्मू एवं कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उडीसा, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, पंजाब और राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के लिए जारी किया गया।
उद्यम कंपनी के गठन को मंजूरी : मंत्रिमंडल की आज की बैठक में इसके अलावा स्वास्थ्य शिक्षा एवं देखभाल, खस्ताहाल कंपनियों के पुनर्गठन और देश में विदेशी निवेशकों की सहूलियत के लिए एक संयुक्त उद्यम कंपनी के गठन को भी मंजूरी दी गई। कपास की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद से हुए घाटे की भरपाई के लिए कॉटन कारपोरेशन ऑफ इंडिया (सीसीआई) को 1473 करोड़ रुपए गैर योजना अनुदान देने पर भी मंत्रिमंडल ने सहमति की मुहर लगा दी।
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