09 मई, 2009
भागवत कथा का श्रवण अमृत कल्प के समान
तीन मई से तुलसीपुर में प्रारंभ श्री 108 गायत्री महाविष्णु महायज्ञ का शनिवार को यज्ञ कुंड में हवन की पूर्णाहुति के बाद समापन हो गया। महायज्ञ के समापन पर वृंदावन से आए संत श्री नारायणदास जी महराज ने कहा कि भागवत कथा का श्रवण अमृत कल्प के समान है। उन्होंने कहा कि अगर इंसान दु:ख में भगवान का सुमिरन करे तो फिर दु:ख होगा ही नहीं। उन्होंने भागवत ग्रंथ पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सारे शास्त्रों व पुराणों का निचोड़ भागवत कथा है।
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