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31 जुलाई, 2009

नेपाल ने पानी छोड़ा, नदियां उफनायीं

नेपाल द्वारा गुरुवार को 2.18 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने से उत्तर बिहार की नदियां उफना गई हैं। बगहा में स्थिति विकट है और नरकटियागंज-सीतामढ़ी रेलखंड के सिकटा स्टेशन पर पानी चढ़ गया है। सुपौल, मधुबनी, दरभंगा व सीतामढ़ी में नदियों के जलस्तर में वृद्धि से कई जगहों पर तटबंध टूटने की खबरें हैं। प.चम्पारण के चौतरवा थाना क्षेत्र के डीह टोला में आठ वर्षीय बालक मसान नदी की तेज धार में बह गया। बारिश के कारण बागमती के जलस्तर में हुई वृद्धि से मुजफ्फरपुर के औराई व कटरा प्रखंड के सौ गांव प्रभावित हैं। इलाके में तबाही मची है, लोग बांध व पक्के मकानों की छत पर शरण लिए हैं। इसी तरह खगडि़या में कोसी व बागमती के जलस्तर में वृद्धि से कई गांवों पर खतरा मंडरा रहा है। खगडि़या में बागमती संतोष स्लूईस एवं अलौली के पास खतरे के निशान को पार कर गई है। इलाके के कई गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। गुरुवार को यहां बागमती का जलस्तर 36.25 दर्ज किया गया, जबकि खतरे का निशान 35.63 है। खगडि़या जिले के बालतारा व बसुआ में कोसी के जलस्तर में क्रमश: 24 व 14 सेमी वृद्धि दर्ज की गई। हालांकि, यह अभी खतरे के निशान से नीचे है। मुजफ्फरपुर के औराई व कटरा प्रखंड के सौ गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है। कई गांवों में आवागमन बंद है। बागमती परियोजना के उत्तरी बांध में दर्जनों जगहों पर कटाव जारी है। बागमती परियोजना उत्तरी और दक्षिणी तटबंध के बीच के गांवों में जिनका पक्का मकान है, उनकीछत पर लोग रह रहे हंै। सैकड़ों एकड़ में लगी धान की फसल नष्ट हो गई है। कमोबेश कटरा प्रखंड के 40 गांवों में भी यही स्थिति है। कई जगहों पर तटबंध टूटने की खबरें हैं। नेपाल द्वारा छोड़े गए पानी की वजह से बगहा में हालत विकट हैं।

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