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29 जुलाई, 2009

पूर्व राजमाता गायत्री देवी का निधन


जयपुर की पूर्व राजमाता गायत्री देवी का आज यहां के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया. वह 90 वर्ष की थीं । उनका विवाह जयपुर रियासत के पूर्व महाराजा सवाई मानसिंह द्वितीय से हुआ था।
गायत्री देवी का उपचार कर रहे चिकित्सक डा सुभाषा काला ने यह जानकारी दी. काला के अनुसार गायत्री देवी का स्वास्थ्य मंगलवार को शाम में अचानक बिगड गया और आज सुबह उनके स्वास्थ्य में और गिरावट आ गई ।
उनके स्वास्थ्य में लगातार गिरावट के कारण आज मध्याह्न करीब चार बजे उनका निधन हो गया । उनके अनुसार गायत्री देवी को पेट की बीमारी के कारण 17 जुलाई को निजी अस्पताल में भर्ती करवाया गया था । उन्होंने राजधानी के संतोकबा दुर्लभजी अस्पताल में अंतिम सांस ली।
गायत्री देवी जयपुर की तीसरी महारानी थी और सवाई मान सिंह [द्वितीय] की पत्नी थीं।

गायत्री देवी के पिता कूचबिहार के राजा थे। गायत्री देवी वर्ष 1939 से 1970 के बीच जयपुर की तीसरी महारानी थीं। उनका विवाह महाराज सवाई मान सिंह द्वितीय से हुआ। गायत्री देवी अपने अप्रतिम सौंदर्य के लिए जानी जाती थीं। वह एक सफल राजनीतिज्ञ भी रहीं। यही वजह थी कि वह अपने समय की फैशन आइकन मानी जाती थीं। राजघरानों के भारतीय गणराज्य में विलय के बाद गायत्री देवी राजनीति में आई और जयपुर से वर्ष 1962 में मतों के भारी अंतर से लोकसभा चुनाव जीता।

गायत्री देवी का जन्म 23 मई 1919 को हुआ था। वह अपने जमाने में दुनिया भर में अपनी अद्वितीय सुंदरता के लिए चर्चा में रहीं। यही कारण था कि दुनिया की खूबसूरत दस महिलाओं में गायत्री देवी शामिल थीं। पूर्व महारानी ने सुंदरता की दौड़ में अव्वल रहने के साथ साथ राजनीति क्षेत्र में भी अपना परचम लहराया और वर्ष 1967 और 1971 में भी उन्होंने जयपुर से लोकसभा सीट पर भारी मतों से जीत अर्जित की।

लंदन में जन्मी गायत्री देवी कूच बिहार के महाराज जितेंद्र नारायण की पुत्री थीं। उनकी मां राजकुमारी इन्दिरा राजे बडौदा की राजकुमारी थीं। गायत्री की आरभिंक शिक्षा शांतिनिकेतन में हुई। बाद में उन्होंने स्विटजरलैंड के लाजेन में अध्ययन किया।

उनका राजघराना अन्य राजघरानों से कहीं अधिक समृद्धशाली था। घुड़सवारी की शौकीन रही पूर्व राजमाता का विवाह जयपुर के महाराजा सवाई मान सिंह द्वितीय के साथ हुआ। गायत्री ने 15 अक्टूबर 1949 को पुत्र जगत सिंह को जन्म दिया। महारानी गायत्री देवी को बाद में राजमाता की उपाधि दी गई। जगत सिंह का कुछ साल पहले ही निधन हो गया था। जगत सिंह जयपुर के पूर्व महाराजा भवानी सिंह के सौतेले भाई थे।

गायत्री देवी की शुरू से ही लडकियों की शिक्षा को बढावा देने में रूचि रही यही कारण रहा कि गायत्री देवी ने गायत्री देवी ग‌र्ल्स पब्लिक स्कूल की शुरुआत की। इस स्कूल की गणना जयपुर के सर्वोत्तम स्कूलों में आज भी है। पूर्व राजमाता ने जयपुर की 'ब्लू पोटरी' कला को भी जमकर बढावा दिया।

गायत्री देवी ने खूबसूरती से दुनिया भर में अपनी पहचान बनाई ठीक उसी तरह गायत्री देवी ने राजनीति के क्षेत्र में भी वर्ष 1962 में जयपुर लोकसभा सीट से चुनाव मैदान में उतरीं और कुल दो लाख 46 हजार 516 मतों में से एक लाख 92 हजार नौ सौ नौ मत प्राप्त कर एक रिकार्ड कायम किया। इसके बाद उनका नाम गिनिज बुक आफ व‌र्ल्ड रिकार्ड दर्ज किया गया।

गायत्री देवी ने वर्ष 1967 और 1971 में जयपुर लोकसभा सीट से स्वतंत्र पार्टी के टिकट पर चुनाव जीता था। उन्होंने लोकसभा चुनाव में कांग्रेस सी रामगोपालाचार्य को भी पराजित किया था। केंद्र सरकार ने वर्ष 1971 में राजघरानों के सभी अधिकार और उपाधियों के इस्तेमाल पर रोक लगा दी। तत्कालीन केंद्र सरकार के आंख की किरकिरी बन जाने के कारण उन्हें कर चोरी के आरोप में पांच महीने तक दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद कर दिया गया।

तिहाड़ से रिहा होने के कुछ समय बाद उन्होंने राजनीति से सन्यास की घोषणा कर दी और लेखन के क्षेत्र में कदम रखा। गायत्री देवी ने वर्ष 1976 में संत रामा राउ के सहयोग से अपनी आत्मकथा के रूप में एक राजकुमारी की याद पुस्तक का लेखन किया। पूर्व राजमाता ने पुस्तक लेखन के अलावा विदेशी निर्देशक के सहयोग से हिंदू राजकुमारी फिल्म भी बनाई।

गायत्री देवी के राजनीति से संन्यास लेने के बावजूद वर्ष 1999 में राजनीति के गलियारे में उनके कूच बिहार से त्रिणमूल कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ने की चर्चा हुई। पूर्व ईसरदा रियासत के महाराजा रहे जगत सिंह का कुछ साल पहले ही निधन हो गया था। जगत सिंह के एक बेटी ललिता तथा पुत्र देवराज सिंह हैं। जगत सिंह के पुत्र पुत्री उस समय चर्चा में आए जब उनकी संपति को लेकर न्यायालय में मामला पेश हुआ।

राजस्थान के राज्यपाल एस के सिंह, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी ने गायत्री देवी के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है।

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